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Wednesday, July 04, 2012

इबाबत के महीने में ठंडक प्रदाता कूलर+फ्रिज को लेकर साम्प्रदाईक गर्मी सडकों पर उतरी

उत्तर प्रदेश के मेरठ हमेशा से ही  साम्प्रदाईक्ता की द्रष्टि से संवेदनशील रहा है पिछले कुछ दशकों से बाज़ार वाद के उभार में यह यह संवेदनशीलता दबी रही है मगर 04-07-2012 को अचानक बाज़ार के दो दिग्गजों के आपसी झगड़ों के कारण बरसों से दबी  साम्प्रदाईक भावना को चिंगारी मिल गई ।  लोग सडकों पर    उतर आये। पथराव हुआ  और साजिशन आतंकवादी   ताकतों के समर्थन में  नारे बाज़ी  भी हुई । दिल्ली रोड पर ट्रेफिक का जाम होना तो लाज़मी था।
   मौजूदा महीना इबादत का है हिन्दू जहां शिव शंकर के नाम की  कावण  उठा रहे है तो मुस्लिम भी  अपनों की याद में शबे बरात मनाते हैं  ऐसे पाक पवित्र महीने में  तीन  समुदाय[सिख++हिन्दु==मुस्लिम]] आमने सामने आ कर नफ़रत के खेल में डूब गए ।
   गर्मी के इस रिकार्ड तौड मौसम में फ्रिज++कूलरों से राहत मिलती है लेकिन इन दोनों  ठंडक  प्रदाता उत्पादों को लेकर  सोती गंज में साम्प्रदाईक पारा ऊपर उठ गया। कुदरत ने जहां ठंडी हवाओं की  छोटी  सी सौगात बक्शी वहीं नफ़रत क पारा ऊपर उठ गया \
  एक सिख व्यापारी रंजित सिंह  ने अपने पडौसी मुस्लिम व्यापारी युनुस  से  अपने होटल लिब्रा के लिए फ्रिज और  कूलरों का सौदा किया इसी लेन  देन  में दोनों में अमानत में खयानत क आरोप प्रत्यारोप लगे  विवाद  बड़ा  और बात समुदायों की प्रतिष्ठा पर आ गई ।एक पक्ष की भीड़ ने  सिख व्यापारी की पगड़ी  उछाल दी   नतीजतन  बबाल हो गया ।दूकान पर हुई दूकान दारों की बात सडकों पर आ गई । व्यापार संघ के दोनों सदस्य हैं सो बीच बचाव की कौशिश की गई मगर अलगाव वादी संघठन के समर्थन में नारे बाज़ी से व्यापारी नेता भी असहज दिखे।  हमेशा की तरह तहरीर पर कुछ  लोगों के विरुद्ध ऍफ़ आई आर  दर्ज हो गया है\सुरक्षा बल वापस बैरकों में भेज दिए गए हैं और  छेत्र  की पोलिस  हमेशा की तरह समस्या पर नज़र रखे हुए हैं\\
    इससे  एक बात तो अंडर  लाईन की ही जानी चाहिए कि [1]आतंकवादी संघठन के समर्थन में नारे बाज़ी के विषय में स्थानीय गुप्तचर एजेंसिओं  की अज्ञानता  किस हद तक क्षमेय  है[2] दिल्ली रोड पर भविष्य में  ट्रेफिक जाम से निबटने कोकोई कारगर यौजना बना ली जानी चाहिए \      [जमोस सबलोक]]
  इबादत के महीने में कूलर फ्रीज को लेकर सोती गंज में  साम्प्रदाईक बवाल 

Saturday, June 30, 2012

दिल के बहलाने को कश्मीरी जन्नत का ख्याल अच्छा ही है।

कश्मीर भारत  की जन्नत है  इसी जन्नत में एक सप्ताह बिता कर हम भी एक सप्ताह के लिए ही सही जन्नत नशीं हो  चुके हैं इसीलिए इस जन्नत की कुछ हकीकत गालिबन हमें भी  हो गई है।जाहिर है की बकौल ग़ालिब दिल के बहलाने को  जन्नत का ख्याल अच्छा ही है।
काश्मीर का दिल श्रीनगर और श्रीनगर की जान डल  लेक है।इस लेक की सफाई की  व्यवस्था के तमाम दावे केवल किताबी ही दिखाई दिए कुछ उदहारण  प्रस्तुत हैं
[1]डल  लेक पर हाउस बोट के वेस्ट  की निकासी और गंदे पानी के ट्रीटमेंट का कोई उपाय नहीं है
[2]डल  लेक के पानी में जीवन यापन करने वाली  मछलिओं  का शिकार करने वाले परिंदों और मानवों की कमी नहीं है लेकिन इस पानी में तैरने वाली काई+घास आदि की भी भरमार है[फोटो 1] जिसके फलस्वरूप साफ़ पानी को  नीचे तक देख पाना असंभव है ।
[3]डल  लेक को साफ़ करने को एक  मशीन  लेक में है मगर इसकी स्पीड बर्ष भर में ढाई  कोस ही है [फोटो 2]
[4]डल  का इलाका व्यापार की द्रष्टि  से महत्वपूर्ण है मगर सफाई की  बद इन्तेजामी व्यवस्था के तमाम दावों पर प्रश्न चिन्ह  लगा रही है  [फोटो 3]
[1] डल  में घास 

[2]घास साफ़ करने वाली मशीन एक किनारे लगी है 

[3]सफाई की बद इन्तेजामी 

[4]अनियंत्रित ट्रफिक 

[5]  कश्मीरी जन्नत ]
[5] आये दिन लगाने वाले ट्रेफिक जाम बेशक घाटी  में पर्यटकों की आमद और घाटी में सामान्य होते हालात का प्रदर्शन करते हों मगर ट्रेफिक पोलिस को भी कहीं न कहीं कटघरे में खडा करते ही है [फोटो 4]

Monday, June 18, 2012

राष्ट्रीय मुद्दों पर लड़े जायेंगे नगर निगम के चुनाव

 भाजपा  द्वारा [लगता है] मेरठ  निगम के चुनाव भी दिल्ली की तर्ज़ पर ही   लड़े जायेंगे निगम स्तर के मुद्दों के बजाये यहाँ भी राष्ट्रीय समस्याओं को उभार कर जीत हासिल कर ली  जायेगी।अक्सर देखा गया है की  स्थानीय स्तर के चुनाव स्थानीय मुद्दों पर  ही  लडे  जाते हैं मगर हाल ही में दिल्ली की तीनो स्थानीय इकाइयों पर भाजपा ने कब्ज़ा किया है इसके लिए वहां  पानी +सड़क+सफाई+अनाधिकृत  कालोनियों  आदि से  सम्बंधित   समस्याएं  गौण   रही और   राष्ट्रीय स्तर के महंगाई+भ्रष्टाचार+सीमा सुरक्षा  आदि मुद्दे फायदेमंद साबित हुए ।
   यही प्रयोग अब पार्टी मेरठ में भी करने जा रही है क्योंकि पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के युवा नेता वरुण गांधी ने18-06-2012 को  मेरठ में अपना पहला चुनावी  भाषण दिया लगभग 20 मिनट के इस भाषण में उन्होंने अपने राष्ट्रीय  विरोधी+सपा+बसपा+कांग्रेस को जम कर कोसा  ।
   मेरठ के शारदा रोड पर  भाजपा के   महापौर  प्रत्याशी हरिकांत  अहलुवालिया के पक्ष में आयोजित  इस जन सभा में  भाजपा के राष्ट्रीय महा सचिव वरुण  गांधी ने अपने राष्ट्रीय नेता और संभवत राजनितिक गुरु  अटल बिहारी वाजपई  के अंदाज़ को अपनाते हुए बड़े कूल  स्वभाव   में तंज़ कसे लेकिन अटल बिहारी वाजपई के भाषणों में व्यंग के साथ हास्य का पुट  भी बहुत  रहता था जिसका आज  के भाषण में सर्वथा अभाव दिखाई दिया । 
    कुछ व्यंगों की बानगी प्रस्तुत है 
 [1]अखिलेश  यादव  बहुत अच्छे कोमल दिल वाले इंसान है मगर उनपर जो उत्तर प्रदेश के शासन का बोझ  डाल   दिया गया है  उससे उनके कमजोर कंधे  झुक गए है।
[2]मायावती जो थी सो थी ये [अखिलेश] भी कम  नहीं  हैं।
[3]एक [अल्पसंखक]वर्ग विशेष को सुविधाएं देने के विरोध में  नहीं  इससे एक समाज का भला हो रहा है  मगर  सबके साथ यह व्यवहार होता तो पूरे  देश का भला होता 
[4]अखिलेश और में[वरुण] युवा होते हुए भी युवाओं को जोड़ नहीं पाए यह काम अन्ना हजारे ने कर दिया 
[5]कांग्रेस पर तो  सीधा प्रहार करते हुए कांग्रेस को महंगाई और भ्रष्टाचार  बढाने वाली  क्रूर सरकार बताया 
[6 ]में[ वरुण] अगर गांधी ना होता तो सांसद नहीं होता कहीं पोस्टर बॉय या अगली कतार में ताली बजाने वाला होता [
[7] भाजपा को भ्रष्टाचार मुक्त पार्टी बताया राष्ट्रीय मुद्दों पर  लड़े  जायेंगे  नगर निगम के चुनाव 

Sunday, June 17, 2012

ग्लोबल सिटी गंगा नगर मेरठ में आज बैंड बाजों के साथ कलश यात्रा निकाली गई।




ग्लोबल सिटी  गंगा नगर  मेरठ में  नवनिर्मित    शिव शक्ति  मंदिर प्रांगन में चल रहे मूर्ति प्राण  प्रतिष्ठा समारोह   के अंतर्गत चल रहे  5 दिवसीय धार्मिक अनुष्ठानों की  पहली प्रक्रिया में आज18 जून 2012 ईस्वी। सोमवार। उत्तरायण। ग्रीष्म ऋतु। राहुकाल की  सुबह  बैंड बाजों के साथ  कलश यात्रा निकाली गई।
 इसमें ३३ सुहागिनों ने पीले अंगवस्त्र धारण करके सर पर जल कलश धारण किया और छेत्र की परिक्रमा भी की सबसे  पहले 
मंदिर प्रांगन में पूजा कराई गई फिर कलश यात्रा  का  संकल्प धारण कराया गया \रंग बिरंगे मिट्टी के कलश पर रौली+ आम के    पत्ते   +चुन्नी से सजाया गया  और उसके ऊपर  नारियल फल सजाया गया    इसके उपरान्त  सर पर   जल  कलश धारण  करके छेत्र  में यात्रा निकाली गई 
22 जून को पूर्ण विधि विधान से विग्रहों की प्राण  प्रतिष्ठा होगी हवं कराया जाएगा   और विशाल भंडारे का आयोजन होगा

Wednesday, June 13, 2012

सर्वोच्च संवैधानिक पद राष्ट्रपति के चुनाव भी अब किसी बेस्ट सेलर सस्पेंस थ्रिलर की भांति हो गए हैं

 यूपी ऐ की अध्यक्षा श्रीमति सोनिया गाँधी ने आज त्रिमुल कांग्रेस की अध्यक्षा और बंगाल की सी एम् ममता बेनर्जी के कान में प्रेसिडेंट के लिए दो नाम क्या फूंक दिए की हंगामा हो गया |अब सभी एक एक करके अपने पत्ते खोलने लग गए हैं| कांग्रेस की एक  चाल  पर सबसे पहले अपने कार्ड्स शो करने में मुलायम सिंह और ममता ने पहल कर दी है 
 भारत का संविधान  सभ्य  समाज के लिए  एक  सभ्य  द्वारा  रचा  गया था  मगर  मात्र  6 दशकों में ही  सभ्यता के सभी  मान्य  पैमाने टाक पर रख दिए गए है  यहाँ तक की सर्वोच्च संवैधानिक  पद राष्ट्रपति  के चुनाव  भी अब  किसी  बेस्ट सेलर सस्पेंस  थ्रिलर  की भांति  हो गए हैं।13-06-2012 के घटनाक्रम को देखते हुए यह चेतावनी देना भी जरूरी है की कमज़ोर दिल वाले कृपया इसे ना देखे या पड़े ।


  श्रीमति गांधी पर पिछले कई दिनों से अपना प्रत्याशी घोषित करने को दबाब था आज उन्होंने यह दबाब दूसरों पर डाल दिया उन्होंने अपने सहयोगी टी एम् सी की अध्यक्षा को प्रेसिडेंट के लिए वितमंत्री प्रणव मुखर्जी और उपराष्ट्रपति के नाम सुझाए |इसके जवाब में ममता बेनर्जी और सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने संयुक्त मीटिंग में इन्हें खारिज करके [१]पूर्व राष्ट्रपति ऐ पी जे अब्दुल कलाम  [२]वर्तमान पी एम् डाक्टर मनमोहन सिंह और [३]पुर्व स्पीकर सोमनाथ चटर्जी के नाम सुझा दिए| अभी मुख्य विपक्षी दल एन डी ऐ और शरद पोवार ने कुछ कहने से गुरेज किया है |ये लोग  अभी भी कांग्रेस के अधिकृत घोषणा  की प्रतीक्षा में ही हैं।
   यह घटना क्रम इतनी गति से   आगे बड़ा की देवानंद की सुपरहिट फिल्म जोनी मेरा नाम  के सस्पेंस को भी  पीछे छोड़ दिया।उत्तरप्रदेश और वेस्ट बंगाल में आर्थिक पैकेज के बदले अपनी 10% वोटों का  समर्थन देने वाले
      मुलायम सिंह यादव+   उपराष्ट्रपति अंसारी  के नाम पर असहमति व्यक्त कर चुके हैं  और ममता का प्रणव के साथ छत्तीस का पुराना आंकड़ा है |24% वोटों वाली 
भाजपा तो संसद में ही   श्री अंसारी की काबलियत पर  प्रश्न  चिन्ह  लगा उन्हें उन्हें  सिरे से ही   खारिज कर चुकी है 
53% वाली यूपीए की अध्यक्षा को  पता था की ममता मुलायम से सलाह करके ही कोई घोषणा करेगी सो ऐसे ही दो नाम रखे गए और उम्मीद के अनुसार ममता+मुलायम सिंह ने कांग्रेस  की दो उम्मीदवारों की लायन को छोटा करने को अपने तीन नाम घोषित कर दिए।अब कांग्रेस के लिए बीएसपी और वामपंथी दलों के विषय में फैसला करने में आसानी होगी  
     अब पुर्व राष्ट्रपति  के नाम पर कांग्रेस को ऐतराज़ है क्योंकि वह भाजपा की भी पसंद है । सोमनाथ को हरा कर ममता जायंट किलर का खिताब जीत चुक्की हैं 50000 वोटों वाली वामपंथी  भी अभी तक सोमनाथ के हाथों अपना अपमान नहें भूले हैं\वैसे भाजपा हमेशा की तरह आम टूटने की फिराक में है क्योंकि अगर आम सहमति के अपने दावे को कांग्रेस पूरा करती है तो उपराष्ट्रपति का पद एन डी  ऐ की झोली में जा सकता है मगर कांग्रेस भी 2014 तक अपनी छवि को  और धूमिल नहीं होने देना चाहेगी कांग्रेस के लिए भाजपा को इन चुनावों में पटखनी देना जरूरी है 
  हमेशा चुप रहने वाले  हसाड़े  सोने ते मंमोहने पी एम् ने  झट  वर्तमान पद के प्रति अपना  आश्चर्यजनक रूप से  संतोष व्यक्त कर दिया |अर्थार्त अभी सस्पेंस  बरकरार है अभी और नाम आने हैं |
   संविधान के अनुसार सीक्रेट बेलेट से ही प्रत्याशिओं का चयन होना है मगर खुले आम इस प्रकार की सौदे बाज़ी सभी समाज की सभी व्यवस्था का प्रदर्शन तो कतई नहीं करती |
जेंटल मेन द्वारा रचित संविधान जेंटल मेन के लिए ही है मगर देश के सबसे संविधानिक पद के चुनाव के लिए इस प्रकार की राजनीति कुछ और ही दर्शाती है

Tuesday, June 12, 2012

।छावनी के ये सौतेले बाप अब निगम पर भी काबिज़ होना चाहते हैं

मेरठ की छावनी परिषद् का हाल भी नगर निगम की तरह ही बेहाल है |कहने को करोड़ों रुपयों का बजट है भारी भरकम कर्मचारिओं का अमला है |आउट सोर्सिंग से काम कराने की सुविधा है|इसपर भी चिकित्सा+शिक्षा+सेनिटेशन +सडकों के मामले जैसी नागरिक सुविधाओं के नाम पर इनकी जितनी भी आलोचना की जाये कम ही है|
[1] केंट को चमकाने के तमाम दावों को झुटलाता  यह सुलभ  शौचालय 
    जिन राजनितिक दलों ने इस परिषद् के लिए चुनाव लड़ा था और छावनी को बहिश्त  बनाने का दवा किया था कमोबेश  वोही  सारे दल अब नगर निगम  के चुनावों  में भी नगर को चमकाने का  दावा कर रहे हैं।छावनी  के ये सौतेले बाप अब निगम  पर भी काबिज़  होना  चाहते हैं।बेशक कुछ दल खुल कर अपने चुनाव चिन्ह  का प्रयोग कर रहे हैं तो कई  बेक  डूर  से लगे हुए हैं।
    आबुलेन की सेन्ट्रल पार्किंग के नाम पर बहुमूल्य सम्म्पतियो के  अधिग्रहण के मामले में  सदेव  आगे रहने वाली यह परिषद् छेत्र में बेशकीमती जमीन की लूट रोकने में एक दम किंकर्तव्यविमूड़ ही है| पूर्व में यह दलील दी जाते थी की यहाँ एलेक्टेद बोडी नहीं है अब अबलेक्टेद परिषद् है केंट का अध्यक्ष भी अब ब्रिगेडियर से मेजर जनरल बना दिया गया है लेकिन सुविधाओं की ट्रेन अभी तक डिरेल ही है|
निर्धन नागरिकों को आवश्यक सुविधाओं के लिए छावनी में सुलभ शौचालय बनवाये गए थे मगर केवल दो दशकों में ही इनकी क्या हालत हो गई है यह इस चित्र को देख कर समझा जा सकता है|यह सुलभ शौचालय माल रोड पर इंस्पेक्शन बंगलो के पीछे है और इसके रखरखाव से ही कम से कम दो परिवारों को रोज़गार मिल सकता है |वैसे अगर इसकी अब जरूरत नहीं है तो इसे नेस्तेनाबूत कर दिया जाना चाहिए क्यूंकि यह उपेक्षित भवन गैर कानूनी गतिविधिओं का स्थल बनता जा रहा है 

Saturday, June 09, 2012

तनाव मुक्त शिक्षा देने का शोर मचाने वाले स्वयम हर छेत्र में तनाव को ही दावत दे रहे हैं शायद यह हमारे सिस्टम की सेहत के लिए ठीक नहीं होगा।

हमारे मिस्टर एच आर डी  काबिल सिब्बल आज कल  जिस  छेत्र  में भी क़ाबलियत दिखा रहे है   उसी  छेत्र  में भ्रान्ति+भय+भद्दापन  दिखाई देता है ।इसीके फलस्वरूप विरोध+विद्रोह+विरक्ति में आपसी सामंजस्य बनता जा रहा है। तनाव  मुक्त  शिक्षा  देने का शोर मचाने वाले स्वयम हर छेत्र  में तनाव  को ही दावत दे रहे हैं शायद यह हमारे  सिस्टम की सेहत के लिए  ठीक  नहीं होगा।
  सिब्बल ने बाबा रामदेव और अन्ना हजारे सरीखे बेस्ट  सेलर  फायर ब्रांड्स के विरुद्ध बोल कर  उत्तर  प्रदेश में अपनी  पार्टी  की फजीहत कराई।शिक्षा के मौलिक अधिकार में अपनी उंगलियाँ जलाई  यह अभी अक्षरः लागू तो हुआ नहीं उलटे विरोध  का सामना करना पड़  रहा है।अब इंजीनियरिंग की परीक्षा के लिए देश भर में एक ही 'परीक्षा  कराने का निर्णय लेकर निशाने 'पर  आ गए है ।इस सिंगल एंट्रेंस प्रयोग को  सफलतम  आई  आई टी की स्वायत्ता +गुणवत्ता पर  अटैक  बताया  जा रहा है।
    मूंछ की इस लड़ाई में आई आई टी कानपुर और मानव संसाधन  विकास मंत्रालय आमने सामने आ गए हैं।जहां एक तरफ कानपुर ने केंद्र की इस  ताना शाही को चेतावनी देकर अपनी व्यवस्था नहीं बदलने की बात कही है वहीं  की हटधर्मी से कानपुर का बजट +शोध  अनुदान पर खतरा मंडराने लगा है।
    इससे बुरा औबर क्या हो  सकता है की देश की राजधानी दिल्ली और  वाणिज्यक  राजधानी मुम्बई ने भी केंद्र के खिलाफ बगावटी सुर  बोलने शुरू कर दिए है जब गुवाहाटी  + खड़क'पुर ने सिबल की क़ाबलियत का समर्थन कर दिया है \इससे पूर्व मंत्री ने स्वयम कहा था की यदि एक भी कालेज इस व्यवस्था का विरोध करेगा तो इसे वापिस ले लिया जाएगा लेकिन वर्तमान आरोप प्रत्यारोप देख कर यह असंभव ही लग रहा है

   गौरतलब है की इंजीनियरिंग की 'पढाई  के लिए देश के  आई  आई टी  संस्थानों का  देश और  विकसित  देशों में अपना विशेष महत्त्व   है इनके अपने अपने प्रवेश नियम हैं सिलेबस  है शायद इसीलिए  यहाँ  के स्नातकों की मार्केट वेल्यू भी है  शेष कालेजों को इस स्तर 'पर लाने के  बजाये  पिछले  कुछ समय से इन्हें शेष  इंजीनियरिंग  बोर्ड आई आई आई टी+एन आई टी++ के स्तर पर लाने का  प्रयास  किया जा रहा है शायद इसलिए इसका प्रखर विरोध भी हो रहा है ।
   मिस्टर एच आर डी सिब्बल की क़ाबलियत पर कानपूर में कुएश्चन मार्क??लग गया है|आई आई टी कानपूर की एकेडमिक सीनेट ने सीना ठोक कर संयुक्त प्रवेश परीक्षा के लिए मंत्रालय के निर्णय को कूड़े दान में डाल दिया है और दूसरे आई आईटी को साथ आने को निमंत्रण भी दे दिया है| कपिल सिब्बल के ड्रीम प्रोजेक्ट शिक्षा के अधिकार पर हो रही छिछालेदारी अभी कम नहीं हुई की ये नया बखेड़ा खडा हो गया लगता है की काबिल वकील सिब्बल की पीठ पर बैठे विवादों के बेताल हटने का नाम ही नहीं ले रहे हैं|
कपिल सिब्बल पूरे देश में इंजीनियरिंग की एक सामान परीक्षा कराना चाहते हैं इसके लिए xii कक्षा के मार्क्स भी जोड़े जाने हैं|चूँकि यह परीक्षा सी बी एस ई के माध्यम से होनी है सो आई आई टी को यह मंजूर नहीं है वैसे तो देश में ४४ स्टेट बोर्ड है यहाँ पेपर  भी आउट  होते रहते हैं।सबकी अपनी मूल्यांकन+ चयन प्रक्रिया है ऐसे ही आई आई टी की भी अपनी प्रक्रिया है इसीलिए आई आई टी देश में अग्रणी है | कुछ सालों से आई आई टी पर सरकारी पकड़ मजबूत करने को कवायद चल रही है| संभवत इसीलिए जे ई ई में बदलाव लाया गया है | हाई स्कूल तक की परीक्षा में कम्पटीशन का तनाव ना हो इसके लिए इसका सरलीकरण किया गया मगर आश्चर्यजनक रूप से इंजीनियरिंग की परीक्षा में प्रतिस्पर्धा को कडा करके तनाव पैदा करना समझ से परे हैं
  इसके अलावा  इस वर्ष   एक ही शहर में 38000 xii  'पास अगली 'पढाई  के लिए दर  दर  भताकने  को मजबूर है इसीलिए नई विवाद 'पैदा करने के बजाए   जो है 'पहले  वह  सजो  लिया   जाये 

Sunday, June 03, 2012

योग गुरु बाबा रामदेव आज दिल्ली में एक दिन के सांकेतिक अनशन और उनका साथ देने के लिए अन्ना हजारे भी एक दिवसीय धरने पर बैठे

योग गुरु बाबा रामदेव आज दिल्ली में एक दिन के सांकेतिक अनशन  और उनका साथ देने के लिए अन्ना हजारे भी एक दिवसीय धरने पर बैठे इस अवसर पर जहां टीम अन्ना एक अनुशासित  जबकि बाबा स्वयम भी अपने सहयोगिओं  के साथ उत्साह में भरे हुए थे | यद्यपि बाबा ने अपने भाषण में कई  बार  अन्ना हजारे को पूरा सम्मान  दिया मगर  फिर भी  कभी कभी अन्ना हजारे के  चेहरे के भाव बदलते भी रहे|
 अब यह बेरी और कैले की  दोस्ती कब तक चल पायेगी समय ही बताएगा |
     सबसे पहले राजघाट पर बाबा रामदेव  अपने ढेरों समर्थकों के साथ  पहुंचे और मौन पर बैठ गए थोड़ी देर के बाद   अन्ना हजारे अपनी टीम के साथ पहुंचे  और उन्हें बाबा के पीछे बैठने का इशारा किया गया इसपर अन्ना ने अग्रिम पंक्ति में बाबा के बाईं और बैठना पसंद किया |बाबा राम देव ने मौन की ओउप्चारिकता पूरी की  और खड़े हो गए उनके समर्थक  भी साथ ही उठ खड़े हुए तब तक अन्ना मौन में ही थे कुछ क्षण इंतज़ार करने के बाद अन्ना को   भी उठा दिया गया| मालूम हो  की पूर्व में अन्ना  अपने समय के अनुसार ही मौन पर बैठे रहे थे और उनके किसी भी सदस्य ने उन्हें उठाने की कौशिश तक नहीं की थी|   
     दोनों ने  महात्मा  मोहन दास करम  चंद  गांधी  की समाधि पर माथा  टेका और पुष्पांजलि अर्पित की |सबसे पहले अन्ना ने माथा टेका और पुष्पांजलि  अर्पित की तब बाबा के हाथ खाली थे  इस पर असहज  होते हुए बाबा ने अपने  सहयोगी बाल कृषण से फूल मांग कर  चड़ाए |इसके पश्चात दोनों ने एक साथ पुष्पचक्र चड़ाए|
   शहीद समारक में  अपने कद से बड़ी शहीदों की मुर्तिओं  पर  फूओं की माला चडाने के लिए बाबा  उछालते रहे लेकिन अपने साथ खडी किरण बेदी को  माल्यार्पण के लिए आमंत्रित करने से नहीं चूके किरण बेदी ने शालीनता का परिचय देते हुए मूर्ति के  हाथों में ही  माला चड़ा दी |अन्ना ने अपने भाषण के अंत में  विशाल भीड़ को सम्भोदित करते हुए कहा की अब बेटरी चार्ज हो गई है तब उनके बाद आये मंच संचालक महोदय कह बैठे की बेटरी तो पहले से ही चार्ज है|इसके अलावा सबसे बड़ा विवाद तो तब हुआ जब अरविन्द केजरीवाल ने अपने भाषण में भ्रष्ट नेताओं के नाम लिए तब बाबा ने उनका विरोध करते हुए किसी का नाम नहीं लेने को कहा और अरविन्द मंच छोड़ कर चले गए ab 
     मंच पर  दोनों दिग्गज एक साथ   बैठे थे  |दोनों के सहयोगी  समय समय पर  उनसे सलाह मशविरा या सूचना देते  रहे मगर जहां अन्ना हजारे की टीम के सदस्य अनुशाषित होकर उनके पीछे से आकर  बात कर रहे थे वहीं बाबा के समर्थक सामने से आकर बात कर रहे थे यहाँ तक की मंचीय माहिर ओज के   सशक्त हस्ताक्षर  हरी ॐ पवार भी सामने से आकर बाबा से गुफ्तगू करते रहे उनके सामने से आने  से अन्ना की छवि टीवी कमरों से छुपजाती थी |
  जन लोकपाल और काले धन की वापसी के लिए जंग अनिश्चित काल तक के लिए लड़ी जानी है ऐसे में  कैले और बेरी का साथ कब तक निभेगा क्योंकि बैर तो अपनी मौज में हवा के रुख पर नाच कर रहा है मगर उसके  काँटों से कैले की  फली कटते जा रहे है

Wednesday, May 30, 2012

विश्वनाथन  आनंद की जीत अपने आप में उम्मीद की जबरदस्त रौशनी है का का 

शतरंज़ के मोहरों के माहिर विश्वनाथन आनंद आज ५वी बार शतरंज़ के विश्व विजेता बनगए\सो बधाई |
आई पी एल की चकाचौंध और भ्रष्टाचार की फ़ैली धुंध में यह जीत अपने आप में उम्मीद की जबरदस्त रौशनी है |
बेशक  क्रिकेट के सचिन या फिर किसी [रिटायर्ड] फ़िल्मी हस्ती की चमक के सामने यह सफलता कम करके आंकी जा सकती है मगर जनता   द्वारा  जो प्यार शतरंज़ के इस खिलाड़ी को दिया जा रहा है यह आनंद को कम से कम भारत रत्न के लिए सुपात्रों की लिस्ट में शामिल जरूर क़र सकती       

Friday, May 25, 2012

कौन सा नया भाजपाई स्यापा जान को आन पडा है

एक  भाजपाई  
               ओये झल्लेया  ये क्या हो  रहा है ओये हमारे सबसे   सीनियर श्री  लाल कृषण  आडवानी  जी और दिल्ली की  प्रखर   नेत्री   श्रीमति  सुषमा स्वराज कल  मुम्बई की रेली   अटैंड  किये  बगैर ही आ गए ओये ये कौन सा नया स्यापा पार्टी की जान को आन पडा है ।ओये अब पेट्रोल की कीमतों  में बेतहाशा बडोत्तरी से सरकार के  गिरने  की  और हमारी  सरकार बनने   की उम्मीद जगी थी  लेकिन  ये  घरेड  तो कहीं का नहीं छोड़ेगी ।
झल्ला  
              भापा जी एक बात बताओ   की नाराज़   होने का ठेका केवल   छेत्रिय  नेताओं  की ही   बपौती है
  'पर्दे  के पीछे से कथ्पुतलिओ  का  खेल  खैलने  वाले ये भूल जाते हैं की जनता और सहयोगी दलों के प्रति जवाब देही  पर्दे  पर छाए  नेताओं की ही होती है अब इनकी मर्जी  के बगैर पीछे से   कोई   राष्ट्रीय    निर्णय    लिया जाता है  तो  पर्दे  पर चल रही पिक्चर पर असर तो पड़ता ही है\
वैसे घबराने की जरूरत नहीं है  देखा नहीं ना  ना करते करते  नरेन्द्र मोदी   आ  गए लड़ते  झगड़ते येदियुरप्पा भी पहुँच ही गए   ।इनकी  भी थोड़ी  देर  की कुट्टी  के बाद  अप्पी  हो ही जायेगी 
एक  कांग्रेसी 
   ओये झल्लैय्या देखा    हँसा  दे पेट्रोलियम  मंत्री  श्री जय पाल रेड्डी  जी का कमाल ।उन्होंने तो पार्टी की   बल्ले  बल्ले करा दी ।विपक्ष  के साथ उनके  हम दर्द  मीडिया  की भी बोलती बंद करदी।  ओये विकलांग  होते हुए भी विदेश से लौटते ही उन्होंने तत्काल    प्रेस कांफ्रेंस  करली   और  साफ़  सपाट शब्दों में पेट्रोल की कीमतों में किसी भी प्रकार की कटौती से इनकार  कर   दिया ।  हुन तो   विपक्ष  की एक नहीं    चलने  वाली।पेट्रोलियम कम्पनिओं का घाटा पूरा हो ही   जाएगा । 
झल्ला 
       ओ   भोले  बादशाओ  बेशक    आपजीके  रेड्डी साहब पेट्रोल की कीमतों    को कम करने को  रेडी  नहीं हुए हैं मगर उन्होंने शातिर राजनितिक पैतरे बाज़ी  जरूर  चल डाली  है।रेड्डी साहब ने कुटिल मुस्कराहट  के साथ कुछ दिनों की मोहलत मांग ली है  अब इन कुछ    दिनों   में रुपया ऊपर उठ  सकता   है   कच्चा पेट्रोल  सस्ता हो सकता है   कुछ भी  नहीं हुआ तो विपक्ष  और नाराज़ जनता  की ताकत का    अंदाजा  तो हो ही जाएगा ।तब उसी रेशो में रोल बैक भी  हो जाएगा ।      क्यों  ठीक है ना ठीक      

Saturday, May 19, 2012

नागरिक उड्डयन मंत्री चौधरी अजित सिंह ने खजाने को प्रदेश के लिए खोला

     केन्द्रीय नागरिक  उड्डयन मंत्री  चौधरी अजित   सिंह ने  अब की बार  मंत्रालय  के खजाने  का  पिटारा अपने गृह प्रदेश के लिए खोल  दिया  है \ प्रदेश की राजधानी में बीते दिन नए  टर्मिनल का उदघाटन करते हुए   सिंह  ने   अनेक  यौजनाओं  को हवा दी ।इस पर प्रदेश मुख्यमंत्री  अखिलेश यादव ने भी सभी प्रकार की      सहायता +सहयोग का  आश्वाशन भी दिया\
 सहयोग+सहायता   के  आश्वासन पाकर  गद गद मंत्री  ने     12 दिनों से  पायलटो की हड़ताल  के  किसी  तनाव के बगैर अनेक यौजनाओं की घोषणा की ।प्रदेश में 
[1]नागरिक उड्डयन   विश्व   विद्यालय 
[2] जहाज़ों के लिए वर्कशाप[ अड्डा ]   
[3] छोटे एयर पोर्ट्स को राजधानी से जोड़ना 
 [4]छोटे पोर्ट्स को   अप ग्रेड  करना 
    इस घोषनाओं  से  गोरखपुर +कानपुर +इलाहाबाद+कुशीनगर आदि की किस्मत का पिटारा खुलने ही वाला है 
[1]संसद में उड्डयन  विकास का आश्वासन देते  अजित   सिंह टी वी फोटो 
क्योंकि युवा मुख्यमंत्री अखिलेश  यादव  ने  केन्द्रीय यौजनाओं   के लिए  उचित मुआवजे  पर जमीन उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दे दिया ।बेशक इन    विकास कार्यों  के लिए  पब्लिक प्रायवेट पार्टनर  शिप का  फार्मूला लागू होगा \यह सब   सुनने  में अच्छा लगता है मगर मेरठ के उपेक्षित हवाई पट्टी के बारे में भी कोई   निर्णय  या घोषणा हो जाती तो जयादा अच्छा लगता [जमोस  सबलोक]


आमिर का कैमरा अभी तक वानखेड़े स्टेडियम के अन्दर नहीं जा पाया है

फिल्म सेलेब्रेटी आमिर खान आज कल टी वी पर हर रविवार को आते हैं और
 बच्चों विशेषकर कन्याओं से जुड़े मुद्दे उठा कर ना केवल वाह वाही से तिजोरी
 भर रहे है वरन मुद्दों को सोल्व कराने को भी पसीना बहा रहे है |
पिछले दिनों उनके बिरादर सेलेब्रेटी शाहरुख़ खान के नन्हे मुन्नों पर वानखेड़े स्टेडियम
 में अत्याचार हुआ | बेशक  शाहरुख़  खान  ने कुदरती कानून का उल्लंघन  किया 
कुदरती क़ानून के मुताबिक़  जबान  और दिल  में हड्डी नहीं होती सो इन्हें लचीला बनाया 
गया है मगर  शाहरुख़ ने इनदोनो में ही  अकड़ पैदा करके मुसीबत मौल ले ली
   सुना  था की चेरिटी बिगिन्स एट होम्स मगर आमिर का कैमरा अभी तक 
वानखेड़े स्टेडियम के अन्दर नहीं जा पाया है अगर किसी मित्र को इसका कारण
 पता हो तो क्रप्या जरूर शेयर करें

Monday, May 07, 2012

प्रणव दा हमें आपसे और कुछ नहीं चाहिए हमें केवल जूट की बोरियां दे दीजिये


प्रणव  दा हमें आपसे और कुछ नहीं  चाहिए हमें केवल जूट  की बोरियां दे दीजिये बोरियां नहीं है इसीलिए किसान की मेहनत का बहुमूल्य  फल अनाज बेकार होने जा रहा है ये गुहार आज संसद में भाजपा की वरिष्ठ नेत्री श्रीमती सुषमा स्वराज ने लगाई |अपने  सहयोगी दल जे दी यूं के शरद यादव   द्वारा गेहूं की बदहाली और सरकार द्वारा इसकी खरीद में तालाम्टोली पर चिंता व्यक्त कर रहे थे इस पर सुषमा ने मोर्चा संभालते हुए मध्य प्रदेश में बोरियों  की आपूर्ति नहीं किये जाने से अनाज की दुर्दशा का चित्रं किया और हाथ जोड़ कर बोरियां माँगी |इस पर   विपक्ष एक जुट हो गया  और लालू प्रसाद  यादव के साथी रघुवंश प्रसाद ने चुटकी लेते हुए बताया की  बिहार में एक बोरे में ४.५ करोड़  रुपयों का काला धन मिला है |गेहूं के लिए बोरी नहीं है मगर काला धन रहने के लिए बोरे उपलब्ध हैं ||इसके पश्चात जे दी यूं के सदस्य स्पीकर के सामने वेल में भी जाने लगे 
संसद में बताया गया की केंद्र सरकार ने  बीते सप्ताह बोरे उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया था मगर आज ७ तारीख को भी स्थिति जडवत ही है |अर्थार्त बोरियां ना होने के कारण गेहूं की  खरीद और भंडारण नहीं हो पा रहा है|
गोरतलब हे की पहले  पोलिथीन के बोरे भंडारण के लिए उपयोग में लाये जाते थे मगर अब पोलिथीन पर रोक है सो जूट के बोरे चाहियें और  इतनी बड़ी संख्या में जूट के बोरे उपलब्ध नहीं हो रहे है |यानि दोनों तरफ से सरकार घिरी है |अगर बोरे दे दिए जाते हैं तो घाटे में जा रहे सरकार को विवश हो कर गेहूं को न केवल खरीदना पडेगा वरन भंडारण की व्यवस्था भी करनी पड़ेगी|और अगर बोरे नहीं दिए जाते तो विपक्ष इस मुद्दे को २०१४ तक जीवित जरूर रखेगा और चुनावों में भुनाएगा भी 

Sunday, May 06, 2012

इतने सारे सियासी गम जान को लगे हों तो विपक्ष के धर्म किसे याद आते है

 इतने  सारे सियासी  गम जान को लगे हों तो विपक्ष के धर्म किसे याद आते है   भाजपा बेचारी  किवें  जीवे मुड़ मुड़ ठंडा पानी पीवे |जी हाँ आज कल बेचारी भाजपा पर यह जुमला फिट बैठ रहा है|
जब से सत्ता सुख छिना गया तभी से मुसीबतें है की एक के बाद एक चली ही आ रही हैं इन्ही में उलझ कर भाजपा अपने विपक्ष के धर्म को ही भूल गई है |ठीक भी है पहले अपने घर की आग को बुझाओ दूसरों का नंबर तो बाद में ही आता है|
एस एस अहलुवालिया की राज्य सभा के लिए  झारखंड में हार से अभी आरोप   प्रत्यारोपों से पार्टी उबरी भी नहीं थी की राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने  विद्रोह का बिगुल बजा दिया है  सूना है की अब तक ५१ विधायक  अपने समर्थन के रूप में पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं|यह विद्रोह भी पार्टी अध्यक्ष  नितिन गडकरी के आदेशों के ही खिलाफ है अहलुवालिया की हार का ठीकरा भी  पार्टी अध्यक्ष  की  राजनितिक  अदूर दर्शिता के सर ही फौड़ा जा रहा है|
   बिहारी बाबू नितीश कुमार अभी तक गुजरात के नरेंदर मोदी को खुल के समर्थन नहीं दे पाए हैं\इसीलिए मोदी के लिए दिल्ली  की राह  आसान  नहीं   हुई  है|मध्य प्रदेश से आयातित साध्वी उमा भारती ने विवादों में घिरे  निर्मल बाबा को समर्थन दे कर  मीडिया के छत्ते में हाथ दे दिया है |दिल्ली की राजनीति के माहिर अरुण जेटली पर  बोफोर्स में अमिताभ बच्चन का नाम घसीटने  कालिख पोती जा रही है|कीर्ति आज़ाद सचिन तेंदुलकर में ही उलझे हुए हैं\यशवंत सिन्हा यदा कदा पार्लियामेंट में मुद्दा उठाते हैं तो वह नक्कार खाने में तूती ही लगती है \ श्रीमती सुषमा स्वराज आज कल बेक फुट पर हैं| पार्टी का मुस्लिम चेहरा मुख्तार अबास नकवी और शाहनवाज़ खान बेचारे टी वी चेनलों पर बेबस नज़र  आ  रहे है |
    यहाँ यह कहना भी लाज़मी है की जब भी भाजपा कमजोर दिखती है या विवादों में घिरती है तभी सी बी आई अपने पुराणी फायलों से धुल साफ़ करके एक नया बखेड़ा खडा कर देती है तभी तो वर्तमान में भाजपा की शोचनीय स्थिति के मध्य नज़र  पार्टी के व्योवर्ध  भारी भरकम नेता लाल क्रिशन आडवानी  को  बाबरी मस्जिद काण्ड में षड्यंत्रकारी  बता कर जांच के घेरे में लिए जाने की बात करने लगी है |अब  जब इतने  सारे सियासी  गम जान को लगे हों तो विपक्ष के धर्म किसे याद आते है  

Monday, April 16, 2012

छौटे मौटे अपराध एक प्रिलिमनरी टेस्ट की भाँती होतें हैं

मेरठ को शिक्षा+स्पोर्ट्स गुड्स +मेडिकल+ मीडिया+लघु उद्योगों का केंद्र[हब]कहा जाता है लेकिन आज  कल यहाँ अपराधों की बाड़ सी ही आई हुई  है। सरे आम कत्ल +सामूहिक बलात्कार+चेन स्नेचिंग+ लूट+चोरी  और डकैती आदि के समाचारों से अखबार भरे रहते हैंशायद इसी लिए छीना झपटी के छौटे मौटे अपराध आज कल के अपराधिक नक्कारखाने में महत्वहीन  तूती बन कर ही रह जाते हैं।मेरा मानना है की अपराध तो अपराध ही होता है छौटा हो या बड़ा यह समाज और सरकार अर्थार्त व्यवस्था को चुनौती होता है इसीलिए तूती की आवाज़ को भी महत्त्व दे कर अपराध निरोधात्मक कार्यवाही प्राम्भ कर दी जानी चाहिए।
     मेरा मानना है की इस प्रकार के छौटे मौटे अपराध एक प्रिलिमनरी  टेस्ट की भाँती होतें हैं जिन्हें सफलता पूर्वक पास करके बड़े अपराध करने के लिए अपराध स्कूल जाने लायक हौंसला मिल जाता है और स्कूल से कालेज में एडमिशन आसानी से मिल जाता है
     इसी प्रकार की तूती रूपी  लूट की एक घटना का गवाह में भी बन गया ।सब कुछ इतनी जल्दी हुआ की जब तक समझ आता बाईक सवार जा चुका था ।
आज सुबह ६ बजे के करीब गंगानगर के दिवायदर रोड पर अचानक एक लड़की[संभवत छात्रा] काली बाईक के पीछे बदहवास  चिल्लाती हुई भागी जा रही थी पकड़ो 'पकड़ो इसने मेरा फोन छीन लिया है । बाईक सवार भी बामुश्किल २३ -२४ साल का स्लिम । क्लीन शेव्ड था मगर चौंकाने वाली बात यह थी की यह लुटेरा बिना हेलमेट के था यानि बेफिक्र था बेखौफ था। जब तक मामला समझ आता तब तक तो बाईक जा चुकी थी।पूरी लगभग २.५ किलो मीटर की सड़क पर खाकी वरदी धारी तो दूर प्रायवेट सुरक्षा कर्मी भी नहीं दिखेमोर्निंग वाक् करने वाले  केवल चर्चा ही करते रह गए। 

Thursday, April 12, 2012

घातक मेडिकल वेस्ट खाकर क्या हालत होगे ???


गोवंश की रक्षा के लिए अनेकों एन.जी.ओ. कार्यरत हैं|आये दिन कोई ना कोई  नारे लगाता नया एन,जी,ओ प्रकट हो जाता है |इस चित्र को देख कर ऐसा लगता है की  इस दिशा में जमीन पर कार्य  नहीं के बराबर हो रहा है|
यह गौवंश खुले में फैंके गए घातक मेडिकल वेस्ट खाने को मजबूर है | मेडिकल वेस्ट खुले में फैकने की पाबंदी है मगर  यह चित्र कुछ और ही मनमर्जी की तरफ इशारा करता है|ऐसे घातक मेडिकल वेस्ट खाकर क्या हालत होगे यह भी समझा जा सकता है

Wednesday, April 11, 2012

पेट्रोल+डीजल के संकट मोचक ये अनुशासित गदर्भ राज


[१]पेट्रोल+डीजल के संकट मोचक गदर्भ राज 




[२]पेट्रोल+डीजल के संकट मोचक  अनुशासित ये गदर्भ राज 
मेरठ वालो को
अगर मौका मिले तो चाँद की मिटटी भी खोद कर गदर्भराजों पर ही  लाद कर ले आयें 
मगर क्या करें हमारी सरकार वैश्वीकरण की मारी है सो विदेशी महंगी तकनीक की ही दीवानी हुई जा रही है|इस तकनीक  के लिए   दिनों दिन बड़ते पेट्रो आयल लुब्रिकेंट के दाम ऐसी की तैसी किये जारहे हैं।
चित्र में दिखाय गए गदर्भ गण गंगानगर के एक प्रबंध शिक्षा केंद्र में मिटटी ढोने जा रहे है
शायद यह भी प्रबंध शिक्षा  में  कोई
लेक्चर या  स्थानीय प्रेक्टिकल होगा |

Tuesday, April 10, 2012

हाय ओये हसाड़ी बैसाखी

बैसाखी दा की बनू 
[१]आंघी तूफ़ान के साईड इफेक्ट्स 


[२]आंघी तूफ़ान के साईड इफेक्ट्स 
आंधी तूफ़ान  के साथ बेमौसमी बरसात जब चलती है तो इनके कहर से मज़बूत और कमजोर सभी धाराशाई हो जाते हैं |  साईड इफेक्ट्स  या लेटर इफेक्ट्स  फोटो में दिखाई दे रहे हैं |इन्हें देख कर  खड़ी गेहूं की फसल और आम के बौरों की हालत भी  समझी जा सकती है|फसल खराब होने के बाद बाज़ार की हालत का अंदाजा  लगाया जा सकता है|किसान और बाज़ार जब बेज़ार होंगे तो  बेचारी सरकार पर पड़ने वाले दबाव की भविष्यवाणी भी की जा सकती है हाय ओये हसाड़ी बैसाखी 
बीते दिन अचानक मौसम ने करवट ली और सबकुछ तहस नहस कर दिया\  मेरठ में  
 लगभग ५.५० अचानक घर के दरवाजे और खिड़कियाँ बजने लगे |उठ कर देखा तो बाहर आंधी चल रही थी और बूंदाबांदी जारी थी| बाहर घुप अन्धेरा छाया था मानो रात का साया घिर आया हो|
इतने में पत्नी जी का फोन आया की माल रोड पर तेज़ बारिश और आंधी से अन्धेरा छा गया है |ऐसे में बिजली का जाना तो लाज़मी है सो समय  मानो ठहर गया हो।
 टी वी चैनल दिल्ली में यही हालात बयान कर रहे थे लगता है की दिल्ली से चल
 कर आंधी +झकड़++ बारिश मेरठ में भी आ गई लुधियाना +पटियाला आदि से फेस बुक फ्रेंड्स ने बताया की वहां भी यही हालत हैमेरठ के एक किसान परिवार से मित्र ने गेहूं की बर्बादी की आशंका जताई  
 
[1]अंधेरी चली बूंदे पडी शाम में ही हो गई रात 



[2]ये कुदरती कहर है 


[3] या मौसम की फटकार
अंधेरी चली बूंदे पडी शाम में ही हो गई रात 
ये कुदरती कहर है या मौसम की फटकार
आज अचनाक लगभग ५.५० अचानक घर के दरवाजे और खिड़कियाँ बजने लगे |उठ कर देखा तो बाहर आंधी चल रही थी और बूंदाबांदी जारी थी| बाहर घुप अन्धेरा छाया था मानो रात का साया घिर आया हो|
इतने में पत्नी जी का फोन आया की माल रोड पर तेज़ बारिश और आंधी से अन्धेरा छा गया है |ऐसे में बिजली का जाना तो लाज़मी है सो समय मनो ठहरा हुआ है |
अभी कुछ देर पहले ही टी वी चैनल दिल्ली में यही हालात बयान कर रहे थे लगता है की दिल्ली से चल कर आंधी +झकड़++ बारिश मेरठ में भी आ गई One Of My Facebook Friend  From Ludhiana Punjab]Keshav Batli Has Informed That The Same Changes Are There Also Bbut He Also Consoled That He His Feeling Pleasant Climate Now. 

Sunday, April 08, 2012

मेलों में हस्तकला और सफाई को महत्त्व दिया जाना चाहिए

मेलों में सफाई भी जरूरी है 

एयर गन से गुब्बारे फोड़ने  का अपना ही मज़ा है 

मानव उत्सव प्रिय अस्ति \
जी हाँ सदिओं से मानव उत्सव मनाने के लिए नए नए ढंग खोज कर अपनी यह चाहत पूरी करता आ रहा है ।मेरठ के जीम खाना मैदान में भी नव सम्वत्सर मेले का दो दिवसीय आयोजन किया गया ।यह मेला हिन्दू नव वर्ष से जुड़ा था सो में ०८=०४=२०१२ को इसके समापन समारोह देखने पहुँच गया ।
विश्व प्रसिद्ध नौचंदी मेले के चलते यह मेला लगाना अपने आप में एक कठिन चुनौती है फिर भी युवाओं ने सराहनीय ढंग से इसे पूर्ण कराया ।
अन्य अनेक आयोजनों के बीच एक हस्तकला का आयोजन का उल्लेख जरूरी है । उत्साही होनहार बच्चों विशेष कर छात्राओं ने कबाड से अनेको उपयोगी वस्तुएं बना कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया रुई से बल्ब और स्ट्रा[ड्रिंक के बाद फैंके जाने वाले प्लास्टिक के पाइप] से गुढियाके साथ ही टूटे डब्बे से पेन होल्डर सराहनीय थे।
    मेने पहले भी हस्तकला या क्राफ्ट को शिक्षा से जोड़ कर इसे रोज़गार परक बनाए जाने की आवाज़ उठाई है इस लिए में यह जरूर कहना चाहता हूँ की इस प्रकार की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए बनाये गए क्राफ्ट की नीलामी करवा कर बच्चों में बांटी जाने चाहिए।इससे शिक्षा को नया आयाम मिल सकेगा।प्रोजेक्ट के नाम पर चल रही लूट को क्राफ्ट के माध्यम से कमाई का जरिया बनाया जा सकता है।
    इस प्रकार के मेलों में मुझे सफाई को लेकर   एक बात बहुत अखरती है वोह है मेला प्रेमिओं द्वारा इधर उधर चाट के पत्ते+पोलिथीन+आदि फैंकना और मेले के बीच में ही स्कूटर या मोटर चला कर धुल उड़ाना ।कहने की आवश्यकता नहीं की खाने पीने के खुले  स्टाल पर धुल पड़ने से बिमारिओं  की  दावत हो सकती है।
    मेलों में हस्तकला और सफाई को महत्त्व दिया जाना चाहिए    जमोस सबलोक 

Friday, April 06, 2012

स्कूलों में शिक्षा सत्र प्रारम्भ हो गया है स्कूलों में चहल पहल +केंटीनोंऔर साइकिल स्टैंड के स्तर+ फीस में बढोत्तरी+बढ़ता  किताबों का  बोझ ++++आदि अनेक समस्यायों से अविभावकों को दो चार होना पड़ रहा है।
यहाँ पर ही  बस नहीं होती सेशन के बीच में भी अनेक खर्चों का बोझ झेलने को अभिशिप्त है।ऐसे खर्चों में से एक खर्चा प्रोजेक्ट का भी है\
    बचपन में सरकारी स्कूलों में पढाई करते समय बीच बीच में क्राफ्ट भी कराया जाता था\ स्कूल में एक पीरियड क्राफ्ट का भी होता था इस में झोपडी+ किताब की जिल्द+फ़ाइल+आर्टिफिशियल फूल आदि बनवाये जाते थे  इन्हें  रोज़गार परक शिक्षा प्रदान की जाती थी।समय   के साथ साथ ट्रेंड भी बदलता गया ।क्राफ्ट का पीरियड किसी और बैकलाग को निबटाने के काम आने लगा सो क्राफ्ट को घर से बना कर लाने के आदेश हो गए\माँ बाप की मदद से सबसे सस्ते कार्फ्ट बना कर पासिंग मार्क्स हासिल करने का चलन चल निकला।
   वर्तमान को माडर्न ज़माना कहा जाता है यानि इस हाईटेक होते जा रही पढाई में स्टुडेंट्स का हाथ से क्राफ्ट बनाना जरूरी नहीं रह गया है अब तो माँ बाप के पास भी बच्चों के लिए तक समय नहीं है तो क्राफ्ट कहाँ से बनवायेंगे ।
   पुराने क्राफ्ट को ही विकसित करके शायद अब प्रोजेक्ट का नाम दे दिया गया है ।छोठी  से लेकर बड़ी क्लास तक प्रोजेक्ट को लाजमी किया गया है ।सरकार का विकास का दावा यहाँ चरित्रार्थ होता दीखता है जब अविभावक स्वयम दो से लेकर चार डिजिट्स तक खर्च  करके अपने होनहार को  रेडीमेड प्रोजेक्ट दिलवाते हैं।इससे बेशक बच्चा पासिंग मार्क्स लाता है मगर विषय में उसका ज्ञान अधूरा ही रहता है ।
   पहले एक आध ही प्रोजेक्ट की दूकान हुआ करती थी मगर अब तो प्रोजेक्ट के तिजारती मोहल्लों से निकल कर बाज़ार में आने लाग गए हैं।ये और बात है की आयकर विभाग की नज़रों से दूर हैं।
 रट्टा फिकेशन से पास होकर वह किसी काम का नहीं रहता ।छौटी नौकरिओन में इस्टर्न यूपी और बिहार के होनहार महनती छात्र आगे निकल जाते हैं और बड़ी नौकरिओन के लिए इन्हें फिर से महंगी  कोचिंग  लेनी पड़ती है।
     अब ऐसा भी नहीं होता की सभी व्यवसाईक परिवार से हों और  सभी को नौकरियां मिल जाये सो ऐसा भी संभव नहीं हो सकता ।उत्तर प्रदेश में बेरोजगार भत्ते की घोषणा के बाद से रोज़गार के दफ्तरों पर रोज़ाना लगती लंबी लाईने इसका गवाह हैं ।
  बेशक काबिल सिब्बल साहब के  मानव संसाधन विकास  मंत्रालय को स्कूली शिक्षा  वेरी गुड और उच्च शिक्षा  एक्सीलेंट दिखाई दे रही है मगर अन्ना हजारे +बाबा रामदेव आदि के आयोजनों में व्यवस्था से असंतुष्ट युवाओं की भीड़ बड़ती ही जा रही है

     कहने का अभिप्राय है की शिक्षण संस्थानों में एक क्लास क्राफ्ट की की आवश्यक है और  क्लास में ही शिक्षक की गाइडेंस में  क्राफ्ट के प्रति रूचि और निपुर्ण्ता प्रदान की जानी चाहिए\इससे ना केवल अविभावकों के सर से करचे का बोझ कम होगा वरन बेरोजगारी की लाइन भी छोठी हो सकेगी \

Tuesday, March 13, 2012

सरकारों के तमाम रोज़गार संबंधी दावे केवल हवा हवाई ही साबित होते हैं।

उत्तर प्रदेश के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जबसे बेरोजगारी भत्ता देने की बात कही है तब से रोज़गार कार्यालायोंमे  युवाओं की कतारें लम्बी होने लग गई हैं।मेरठ में तो 'प्रतिदिन यह आंकडा ३००० को छु रहाहै।
   यद्यपि यह  भत्ता ३५ वर्षीय[१२वी पास] बेरोजगार को ही मिलेगा मगर रोज़गार दफ्तर में  पोस्ट ग्रेजुएट तक लाइन  लगाए हैं\शादी शुदा +पिता+माता+तक एक हाथ से अपने शिशुओं को गोद मेंसंभाले और दूसरे हाथ  में कागजात  लिए घंटों लाइन में खड़े रहते हैं।
   प्रदेश के रोज़गार कार्यालयों में बेरोजगारों के पंजीयन के आंकड़ों पर नज़र डालने से पता चलता हे के वर्ष २०१० में ४.२५ लाख पंजीयन होने के साथ यह संख्या १९.८० लाख पर पहुँच गई।
   बेरोजगारों के दिनों दिन बड़ती लाइनों से चिंता होना  स्वाभाविक है ।इससे एक बात साफ होजाती है की पुराणी[केंद्र+राज्य] सरकारों के तमाम रोज़गार संबंधी दावे केवल हवा हवाई ही साबित होते हैं।और अखिलेश जी देश को बेरोजगारी भत्ता आगे नहीं बढ़ाएगा वरन रोज़गार के अवसर पैदा कीजिये क्योंकि अमेरिका भी अपने यहाँ यह भत्ता दे रहा है मगर वहां बेरोजगारों की संख्या निरंतर बढ ही रही है।   

Tuesday, March 06, 2012

४ राज्यों में कांग्रेस की हार किस पर सवालिया निशाँ लगाती है

४ राज्यों में कांग्रेस की हार किस पर सवालिया निशाँ लगाती है 
[१]राहुल गांधी के व्यक्तित्व  के करिश्मे पर या राहुल पर मीडिया का जरुरत से ज्यादा फोकस 
[२][१] पंजाब [११]उत्तर प्रदेश [१११]गोआ या फिर उत्तराखंड में कांग्रेस का नेतृत्व
[३]केंद्र सरकार में थोपे गए प्रदेश के मंत्रिओं की ख्वाह्मखाह  गालबजाही 
[४]केंद्र सरकार की हवा हवाई नीतियाँ 
[५]या फिर विपक्षियों की नीतियाँ या कार्यवाही 

Sunday, March 04, 2012

जिनका मुह नहीं देखने को कसमे खाई जाती रही।अब वोही दायें बाएं मेल जोल की ख्वाहिशें उछाल रहे हैं।

लो जी करलो गल  हाँ जी  यूं पी में करोड़ों रुपये कर्च करके चुनाव करवाए मगर  १६ वीं विधान सभा के लिए मीडिया में  घरैड पै ही गई।पार्टियों में भम्बरभूसा पै गया+नेता बेचारे  सरकार बनाने या मुख्यमंत्री बनाने के लिए गद्दी घेर में घिर गएहैं मतबल  नतीजे की भैंस गई पानी में ।
       पोस्ट पोल नतीजों में [हंग असम्बली] लटकती विधान सभा की सम्भावनाओं को व्यक्त किया गया है।ऐसे में पूर्व  प्रचारित रास्त्रपति शासन से बचने से राजनितिक गठजोड़ के समीकरण तलाशे जाने लगे हैं\कल तक जिनका मुह नहीं देखने को कसमे खाई जाती रही।अब वोही दायें बाएं मेल जोल की ख्वाहिशें  उछाल रहे हैं।
       रालोद के   युवराज  जयंत चौधरी ने अपने पिता अजित सिंह की पूर्व घोषणा के विरुद्ध सपा के दरवाज़े खुले होने की बात लीक कर दी ।दूसरी तरफ  सपा  प्रमुख मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल यादव इसका खंडन करते हुए किसी भी गटबंधन से इनकार कर रहे है
        कांग्रेसी स्टील मंत्री बैनी प्रसाद वर्मा  मुलायम सिंह यादव के मुकाबले मायावती के प्रति राजनितिक आकर्षण का प्रदर्शन कर रहे हैं।राशिद अल्वी बेचारे चीख चीख कर नतीजों के लिए निर्धारित ६ मार्च तक प्रतीक्षा करने की दुहाई दे रहे हैं।
       भाजपाई नेतागण प्रदेश में प्रेसिडेंट रूल  को विफल करने को किसी भी हद तक जाने को ताल ठोकते फिर रहे हैं।अब ६ मार्च को 'पता चलेगा की प्रदेश में असली युव राज कौन है [अ]राहुल गांधी[आ]अखिलेश यादव[इ]जयंत चौधरी 

Wednesday, February 29, 2012

उपेक्षा के खात्मे को अब चुनाव आयोग +निर्वाचन अधिकारी +सम्बन्धित विभागाध्यक्ष को मिल बैठ कर विचार करने को समय निकालना होगा ।

  चुनावी तनाव झेल कर लौटे कर्मी विशेषकर केंद्र सरकार के कर्मी स्वयम को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।चुनावी तनाव झेल कर लौटे कर्मी विशेषकर केंद्र सरकार के कर्मी स्वयम को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
      उत्तर प्रदेश की विधान सभा के लिए कराये जा रहे चुनावों के छह चरण निर्विघ्न पूर्ण हो चुके हैं और अब शेष चरण  भी पूर्णता ग्रहण करने जा रहे हैं।इन चुनावों की सफलता का सेहरा बेशक चुनाव आयोग अपने सर पर बाँध कर खुश होता रहे मगर चुनावों को सफलता से पूर्ण कराने में सरकारी कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है लेकिन हमेशा की तरह इस बार भी   चुनावी तनाव झेल कर लौटे कर्मी विशेषकर केंद्र सरकार के कर्मी स्वयम को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। चुनावी तनाव झेल कर लौटे कर्मी विशेषकर केंद्र सरकार के कर्मी स्वयम को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
         सबसे पहले तो पद की  वरीयता +गरिमा  की उपेक्षा करके ड्यूटी लगाई गई अपमान का घूँट पे कर ड्यूटी करने को मजबूर ये चुनाव अधिकारी जब दिएर रात घर लौटे तो उन्हें  चुनाव के तुरंत बाद का अवकाश [घोषणा के बावजूद]नहीं  दिया गया।यहाँ तक की रक्षा लेखा नियंत्रक सेना में तो घरों से फोन करके  सभी कर्मियों को बुलवाया गया \बैंक जैसे संगठित संस्थाओं में जहां अवकाश का माहौल रहा वहीं सी डी ए में मन मार कर व्यवस्था को कोसते हुए काम करते कर्मे देखे गए।
      हद तो तब हो गई जब महीने की आखरी तारीख को बांटी जाने वाली तनख्वाह बांटी  ही नहीं  गई \
   प्रत्येक चुनावों के बाद इस प्रकार की उपेक्षा के खात्मे को अब चुनाव आयोग +निर्वाचन अधिकारी +सम्बन्धित विभागाध्यक्ष को मिल बैठ कर विचार करने को समय निकालना होगा ।

Monday, February 27, 2012

जननी +बेस्ट हाफ +अर्धांगिनी या आधी आबादी कहे जाने के बावजूद भी आज सत्ता में अपने जायज़ हक़ के लिए सत्ता के मौजूदा ठेकेदारों के रहमो करम पर ही टिकी हैं

 सत्ता में महिलाओं  को भागेदारी  देने के लिए गला फाड़ कर नारे लगाने वाले आज महिलाओं को टिकट देने से कतरा रहे हैं ।जननी +बेस्ट हाफ +अर्धांगिनी  या आधी आबादी कहे जाने के बावजूद भी आज  सत्ता में अपने जायज़ हक़ के लिए सत्ता के मौजूदा ठेकेदारों के रहमो करम  पर ही टिकी हैं।हाँ ये दीगर बात है की करोड़ पतियों की ११०३ की फौज में  १०%दागी प्रतियाशिओं पर भरोसा जताया गया है।
     उत्तर प्रदेश की विधान सभा के लिए कल[आज]६ठा चरण पूर्ण होगा इसमें ६८ सीटों के लिए २११८६४८९ [इनमे से ९३९२०९५ महिला] मतदाता ११०३ प्रतियशिओ में से अपने  प्रतिनिधि  चुनेंगें ।
    मुख्य ५ दलों ने   महज़ १० महिलाओं परही भरोसा जताया है।
    बसपा की मुख्य मंत्री एक शक्त महिला हैं और भाजपा की कमान उमा भारती जैसी फायर ब्रांड नेता होने के बावजूद इन्होने केवल  ६८ में से तीन  तीन टिकट ही महिलाओं को दिए  हैं। कांग्रेस  की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी एक महिला  सशक्ति करण की पक्षधर रही  है  बेशक यह एतिहासिक पार्टी केवल ३२ सीटों तक ही सीमित है मगर इनके बेड़े में एक भी महिला नहीं है  सपा  और रालोद ने आश्चर्यनजक रूप से क्रमश तीन और एक सीट पर महिलाओं को उतारा है।अपने लिए जमीन तलाशती जेडीयू और पीस पार्टी  ने क्रमश एक और तीन सीटों पर महिलाये उतारी हैं।
 इसके अलावा मेरठ की  सात सीटों के लिए  साड़े इक्कीस लाख मतदाता अपनी पसंद को  ई.वी,एम्. में बंद करेंगे।
    इनमे से  लगभग साड़े नौ लाख महिलायें भी अपनी पसंद का इज़हार करेंगी।
 इस अवसर पर अपना भाग्य आज़मा रहे ११८  प्रतियाशिओं में से केवल सात महिलायें ही चुनावी मैदान में हैं।
    इस छेत्र में चार मुख्य राजनितिक दल हैं इन्होने एक भी महिला को टिकट नहीं दिया है।
    सिवाल ख़ास में दो सरधना में तीन हस्तिनापुर  और कैंट में  केवल एक एक महिला ही  पुरुषों के इस मैदान में अपना भाग्य आजमा रही हैं।ये सभी निर्दलीय हैं और केवल चुनाव ही लड़ रही हैं।और यह किसी भी दशा में उचित प्रतिनिधित्व नहीं कहा जा सकता।
   अपराध और भ्रस्ताचार के विरुद्ध लगातार ताल ठोंकने वाले दलों नेकरोड़पतियों पर ही दावं लगाया है और तो और   लगभग १०%दागी प्रत्याशी मैदान में उतारने से गुरेज़ नहीं कियाहै ।
बसपा ने ६८ में से  २०  सपा ने ३१ भाजपा ने ३० कांग्रेस के ३५ में से १६ और जे.डी यूं.के ३४ में से १० किसी भी सूरत में गले के नीचे नहीं उतर रहे
 
 
     

Wednesday, February 22, 2012

चुनावों में ऐसी खबरों से चुनावी नुकसान कम से कम हो

आज अखबारों में एक खबर छपी है कि
 दिल्ली पोलिस की  अपराध शाखा ने पाकिस्तान के जासूस कामरान अकबर को दिल्ली के रेलवे स्टेशन से रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया |
इस खबर से यह तो साबित हो गया कि दिल्ली पोलिस दिली मुबारक बाद की लगातार +जोरदार= हकदार है मगर फिर ख्याल आता है की यूं.पी. में चुनाव चल रहे हैं ऐसे में मध्यप्रदेश से तड़ीपार होकर आये और यूं.पी. में बने बैठे कांग्रेसी अवतार जनाब दिगविजय सिंह की राय का इंतज़ार कर लिया जाता|क्या पता उन्हें इस विषय में कोई नई जानकारी हो जिसके उगले से यूं.पी. चुनावी फ़ायदा पार्टी को मिल सकता चुनावों में वोट बैंक का ख्याल तो रखना ही पड़ता है।यह भी देखना पड़ता है कि चुनावों में   ऐसी  खबरों  से   चुनावी नुकसान कम से कम हो

Wednesday, February 15, 2012

वेलेंटैनी खाने और व्यवस्था के बेमजा स्वाद से मूह और दिल दोनों का स्वाद बिगड़ गया।

 वेलेंटाइन डे पर अपनी वेलेंटाइन के आदेश पर १४=०२=२०१२ को स्ट्रीट फ़ूड खाने का  वेलेंटैनी  अवसर प्राप्त हुआ ।दिमाग में बचे खुचे घोड़ों को बेतहाशा दौडाने पर सस्ता सुन्दर और टिकाऊ आबुलेन जाने का निर्णय लिया गया।पुराने अखबारी अनुभवों के आधार पर दिन  और शाम को  जाने का ख्याल  त्याग कर शाम का सरूर उतर जाने के बाद ही जाने में अक्लमंदी दिखाई दी\सो  साड़े सात बजे आबुलेन पहुच गए\
चाट बाज़ार में काई या जंग लगी उपेक्षित छतरी 

[२]चाट बाज़ार में काई या जंग लगी उपेक्षित छतरी 

 [३]चाट बाज़ार के शिलान्यास पत्थर 

[४]]चाट बाज़ार के शिलान्यास पत्थर 


आबुलेन पर खड़े  निर्विरोध ठेलों से स्ट्रीट फ़ूड का स्वाद 
      पूर्वनुभासों के अनुरूप वहां पर युवाओं का जमावड़ा या धक्का मुक्की नहीं थी मगर आश्चर्यनजक रूप से विवाहित और ज्यादा तर अधेड़ [शायद विवाहित ही होंगे]जोड़े वेलेंटैनी मूड में दिखाई दिए\जिस आबुलेन से किसी समय ठेले हठा दिए गए थे वहां अब बेतरतीब ठेलों पर स्ट्रीट फ़ूड उपलब्ध था ।कार या बाइक सवार अपनी वेलेन्तैन की खातिर यहाँ स्वीटकार्न+गोलगप्पे+टिक्की+शक्कर कंदीकी स्वादिस्ट चाट  से च्ट्कोरी जीब की आत्मा को संतुस्ट करते दिखाई दिए। यह नाचीज़ भी इसी वेलेंटाइन  दौड़ में शामिल हो गया मगर पेटकी मांग पूरी करने को और जेब की फरयाद  पर  चाट बाज़ार जाना जरूरी हो गया।यहाँ मिडिल लोअर क्लास के साथ साथ मिडिल क्लास के कुछ मिडिल शौकीन थे ।  वहां चिल्ली पनीर+मोमोस+चौमीन+आइसक्रीम आदि  को ठूंसा गया।यहाँ के खाने और व्यवस्था के बेमजा स्वाद  से मूह और दिल दोनों का स्वाद बिगड़ गया।
        उत्तर प्रदेश के मेरठ छावनी परिषद् की आज कल बैठक चल रही है |इसमें जोर शोर से विकास की बात की जा रही है मगर वास्तव में विकास के नाम पर रखरखाव के नाम पर या सुविधाएँ देने के नाम पर किये जा रहे कार्यों या दावों की पोल खोलता है यह बाज़ार। कैंट बोर्ड द्वारा विकसित इस बाज़ार में |वेलेंटाइन डे  पर भी  खाद्य पदार्थों की जाँच तो दूर रही यहाँ पुताई तक नहीं करवाई जा सकी है।टाइल्स लगवाने के वर्षों पुराने वादे अभी भी फाइलों में बंद है।शायद इसीकारण यहाँ के खाद्य पदार्थ बेशक सस्ते हैं मगर क्वालिटी और स्वाद से कौसों दूर हैं।
आबुलेन में ट्रेफिक व्यवस्था सुधारने के लिए यहाँ चाट बाज़ार खोला गया था आबुलेन के ठेले वालों को यहाँ व्यापार करने को अवसर दिया गया था|महज़ १२ साल में ही यह बाज़ार बोर्ड की उपेक्षा से स्वयम को ठगा सा महसूस कर रहा है| बीते १२ सालों से यहाँ पुताई तक नहीं करवाई जा सकी है\एक अदद छत्री नुमा कुछ बनाया गया था उस पर भी उपेक्षा के निशाँ गहराते जा रहे है \आबुलेन पर ठेले दुबारा लगने लगे हैं|ट्रेफिक की ऐसी की तैसी होने लग गई है|यहाँ कानूनी बाज़ार का व्यापार प्रभावित हो रहा है\यह सब हाकिमो की ठीक नाक के नीचे हो रहा है|

Tuesday, February 07, 2012


Tuesday, February 7, 2012

वेलंतायनी मौसम चालू आहे सो हैप्पी वेलंतायन टू आल Happy Valentine Season

वेलंतायनी मौसम चालू आहे सो हैप्पी वेलंतायन टू  आल Happy Valentine Season 
मौसम में मस्ती हैं +मज़ा है +मिन्नत है+मन्नत है+मंज़र हैं+मंजूरी है ।चुनावी आशिकों का  हर मौड़ पर मजमा है| मौसमी नेता मजनूओं की तरह अपने लिए वोटर को लुभाने में लगे हैं|अर्जुन की तरह वोटर की आँख पर निशाना साध रहे हैं।
  ऐसी निशाने बाज़ी  की मौसमी मौज के बाद तो  वोटर के साथ साथ उसके परिवार को भी  बेमौज़ मरना ही है|आज कल हर तरफ चुनावी बयार है सो चुनावी आशिकों की बहार है| लड़कियों के स्कूल कालेजों के बाहर शोहदे हाथों में अपना दिल लिए खड़े दिखाई देने लगे हैं|इनके हीरो संजय दत्त ने भी अपना वेलंटाइन कांग्रेस में तलाश लिया है 
   यहाँ तक की  रॉबर्ट वढेरा भी अपनी पत्नी प्रियंका के प्रेम में प्रियंका के भाई के लिए  राजनितिक  समर्थन जुटाने  में कुछ भी बोलने लगे  हैं | पाकिस्तानी गिलानी  सार्वजनिक रूप से भारत से पींगे बढाने की बात करने लग गए हैं| भारत से काश्मीर के लिए युद्ध को अनावश्यक अनुपयोगी बताने लगे हैं\  शायद  मौसम का ही यह असर होगा की संयुक्त रास्त्र की सुरक्षा परिषद् में सीरिया के रास्त्रपति बशर अल असद को वीटो का उपहार देकर चीन और रूस ने अपना प्यार प्रगट कर ही दिया|अब शायद बशर अल असद को बगावत का सामना[ कुछ समय के लिए ही सही ] नहीं  करना पडेगा।
   जिस प्रकार संजय दत्त ने मुलायम सिंह यादव की एस.पी को छोड़ दिया वैसे ही  अपने वेलंटाइन को  भी तलाक दिया जा सकता है।मगर चुनावों में   गलत नेता को वेलंटाइन बनाने के बाद उसे तलाक अर्थार्त राईट टू रिकाल की कोई गुजाइश नहीं है इसीलिए भाई बांधुओइस सबसे हमें क्या अभी तो हमें अपना सही+ उचित+ सच्चा वेलंताईं Valentine ढूँढना है सो ..............

Saturday, February 04, 2012


मेरठ की छावनी परिषद् में  भ्रस्ताचार के ज्वलंत मुद्दों से आम  जन का ध्यान हटाने को  बासी कड़ी में उबाल लाने की पुराणी रिवायत है जिसका पालन आजकल भी हो रहा है|अतिक्रमण और  अनाधिक्रत मोबाईल टावर काण्ड में गले गले तक फंसे अधिकारी +कर्मचारी +और टावर काण्ड में चिन्हित पार्षद एक जुट हो गए हैं और अपने बचाव के लिए शिवाजी कालोनी उर्फ़ लाल क्वाटरों को  खूब उछाल रहे हैं|इस कार्य में इन्हें स्थानीय मीडिया के एक हिस्से का सहयोग भी भरपूर मिल रहा है|
     आज़ादी के बाद विस्थापितों के पुनर्वास के लिए केंद्र सरकार ने  तत्कालीन  बोर्ड को मेरठ+आगरा+जालंधर+पुणे आदि में पुनर्वास कालोनियां बनाने का दायित्व सौंपा|यह ना लाभ ना हानि के आधार पर वितरित किये जाने थे|एक निश्चित अवधि तक केयर टेकर की  भूमिका निभा कर  कैंट   बोर्ड द्वारा इन लो इनकम हाऊसिंग स्कीम को लाभार्थिओं को सौंपा जाना था |कुछ समय पश्चात जब ये पिछड़ी +उपेक्षित कालोनी विकसित हो गई तो सबकी निगाह में यह सोने का अंडा देने वाली मुर्गी बन गई।नतीजतन  तत्कालीन पार्षद+अधिकारियों ने एक अनुचित रिसोलुशन पास करा कर कैंट बोर्ड के कर्मियों को ही विस्थापित घोषित कर दिया और एक पूरी कालोनी कैंट बोर्ड के कर्मियों को सौंप दी गई।
    उल्लेखनीय है कि कैंट कर्मियों को  सरकारी सेवक होने के नाते सरकारी आवास तो दे दिए गए मगर उन्हें सरकारी किराया भत्ता भी दिया जाता रहा है।जबकि सरकारी आदेशानुसार सरकारी आवास दिए जाने पर  मकान किराया भत्ता नहीं दिया जाता।
     समय समय पर लीगल रेसिडेंट्स को  अनाधिक्रत +अतिक्र्मंकारी घोषित करके मकान खाली करने को प्रताड़ित किया जाता रहा।कुछ मकान कब्जाए भी जा चुके हैं और कैंट बोर्ड कर्मियों को दिए जा चुके हैं ।इसके अलावा ३० से अधिक मकान खाली करा कर अनाधिक्रत कब्जेदारों को दे दिए गए हैं।इस परोपकार के लिए ५००० से लेकर ७५००० रुपये तक बोर्ड के खाते में  भी जमा करवाए गए । टेबल के नीचे कया हुआ होगा समझा जा सकता है।
     एक  और रिसोलुशन पास करा कर १९८२ में कालोनी के रखरखाव को कैंट बोर्ड ने हाथ पीछे खीच लिए मगर  मासिक किश्त को किराए का रूप देकर लगातार किराए बढाने को नोटिस जारी होते रहे।
     कैंट बोर्ड के इस तानाशाही कदम के विरोध में पुणे +जालंधर+आगरा के तर्ज़ पर मेरठ के लोग भी अदालत गए ।हाई कोर्ट में किराए में वृधि के अपने निर्णय को सही ठहराने को गलत शपथ पत्र दाखिल किया गया जिसमे मेरठ के कैंट बोर्ड ने दावा किया कि कालोनी के रखरखाव के लिए खर्चा बढ जाने से किराया बढाया जाना जरूरी है।इस दलील को माननीय काटजू[तत्कालीन जज ] ने कालोनी वासियों की अपील खारिज कर दी गौर तलब हे की इन्ही माननीय काटजू जी ने जालंधर की कालोनी वासिओं को राहत देते हुए कैंट बोर्ड के सभी दावों को खारिज कर दिया था आज कल यही काटजू जी प्रेस परिषद् के अध्यक्ष हैं शायद उन्हें अभी भी इस केस के विषय में कुछ याद रहा होगा।
     अब फिर से इस मुद्दे को उछाल कर   दशकों पूर्व पुनार्स्थापितों को बुढापे में मानसिक उत्पीडित करके  अपने घरों से बेदखल करने को षड्यंत्र रचे जा रहे हैं।